प्रस्तावना:
ईसाई धर्म के मूल आधारों में से एक सबसे महत्वपूर्ण सत्य है प्रभु यीशु मसीह का क्रूस पर बलिदान। यह केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण मानव जाति के लिए परमेश्वर के प्रेम का महानतम प्रमाण है। यीशु मसीह ने क्रूस पर अपने प्राण देकर पाप के दंड को स्वयं पर ले लिया और हमें उद्धार का मार्ग प्रदान किया।
krus Ke Maran Se Prabhu Lyrics In English
krus ke maran se prabhu
jeewan meko deley
kahiyo ni badla yeshu toke dewe prabhu
jeewan mor prabhu soip delo toke
ab tore upper yeshu /masih moy jeewan bitabu
Mor pyaar khaatir prabhu toyan kroos kar maaran
chunaale toy yeshu mor mukti laagin
tor mahima kaise karaboo ab tore oopar yesu moy jeevan bitaaboo
Daya tor yeeshu maneva kar khaatir
karale khilauna prabhu apane ke balee
tor mahima kaise karaboo ab tore oopar yesu moy jeevan bitaaboo
krus Ke Maran Se Prabhu Lyrics In Hindi
क्रूस के मरन से प्रभु
जीवन मेको देले
कहियो नी बदला येशु तोके देवे प्रभु
जीवन मोर प्रभु सोइप देलो टोके
अब तोरे ऊपर येसु/मसीह मोय जीवन बिताबू
मोर प्यार खातिर प्रभु तोयं क्रूस कर मारन
चुनाले तोय येशु मोर मुक्ति लागिन
तोर महिमा कैसे करबू अब तोरे ऊपर येसु मोय जीवन बिताबू
दया तोर यीशु मनेवा कर खातिर
करले खिलौना प्रभु अपने के बली
तोर महिमा कैसे करबू अब तोरे ऊपर येसु मोय जीवन बिताबू
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1. पाप और उद्धार की आवश्यकता
बाइबल के अनुसार, सभी मनुष्य पापी हैं और पाप का फल मृत्यु है (रोमियों 3:23, 6:23)। पाप केवल शारीरिक मृत्यु ही नहीं, बल्कि आत्मिक मृत्यु और परमेश्वर से अनंतकाल तक दूर होने का कारण भी बनता है। चूंकि मनुष्य अपने बल से स्वयं को इस पाप से मुक्त नहीं कर सकता
2. क्रूस पर प्रभु का बलिदान
यीशु मसीह का जीवन और उनका बलिदान बाइबल में प्रमुख स्थान रखता है। प्रभु ने हमारे पापों को धोने के लिए क्रूस पर अपने प्राण न्योछावर किए। मत्ती 27:32-56 में विस्तार से बताया गया है कि कैसे यीशु को अन्यायपूर्ण रीति से दोषी ठहराया गया, अपमानित किया गया और अंततः क्रूस पर चढ़ाया गया।
3. बलिदान का उद्देश्य और महत्व
यीशु मसीह के क्रूस पर मरण का मुख्य उद्देश्य मानवता के लिए उद्धार प्रदान करना था। उनके बलिदान से हमें कई महत्वपूर्ण आशीषें प्राप्त होती हैं:
- पापों की क्षमा: यीशु का लहू हमें हमारे पापों से शुद्ध करता है (1 यूहन्ना 1:7)।
- परमेश्वर से मेल-मिलाप: पाप के कारण हम परमेश्वर से दूर हो गए थे, लेकिन यीशु के बलिदान ने हमें फिर से परमेश्वर के समीप ला दिया (रोमियों 5:10)।
- अनंत जीवन का वरदान: जो कोई यीशु पर विश्वास करता है, उसे अनंत जीवन प्राप्त होता है (यूहन्ना 3:16)।
- अनुग्रह द्वारा उद्धार: अब हमें अपने कार्यों से नहीं, बल्कि परमेश्वर के अनुग्रह से उद्धार प्राप्त होता है (इफिसियों 2:8-9)।
4. क्रूस का संदेश और उसका प्रभाव
यीशु मसीह के क्रूस का संदेश केवल एक धर्म या संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण विश्व के लिए उद्धार और प्रेम का संदेश है। क्रूस हमें निम्नलिखित सिखाता है:
- परमेश्वर का प्रेम: क्रूस हमें यह दिखाता है कि परमेश्वर हमसे कितना प्रेम करते हैं। उन्होंने अपने पुत्र को हमारे लिए बलिदान किया (रोमियों 5:8)।
- दीनता और सेवा: यीशु ने अपने अनुयायियों को सिखाया कि वे भी दूसरों की सेवा करें और उनके लिए प्रेम रखें (यूहन्ना 13:12-17)।
- क्षमा और दया: जैसे यीशु ने हमें क्षमा किया, वैसे ही हमें भी दूसरों को क्षमा करना चाहिए (मत्ती 6:14-15)।
krus Ke Maran Se Prabhu Lyrics निष्कर्ष:
यीशु मसीह का क्रूस पर बलिदान केवल इतिहास की एक घटना नहीं है, बल्कि यह आज भी हम सभी के लिए प्रेम, उद्धार और आशा का संदेश देता है। उनके बलिदान ने हमें अनुग्रह, क्षमा और अनंत जीवन का मार्ग दिखाया। अब यह हम पर निर्भर करता है कि हम इस संदेश को कैसे अपनाते हैं। क्या हम इस महान बलिदान को स्वीकार करके प्रभु के साथ अपना जीवन बिताने का निर्णय लेंगे?
“परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जय प्रदान करता है।” (1 कुरिन्थियों 15:57)